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12 जनवरी 2026/ महासमुंद/ किसानों के खून – पसीने से उपजाया गया धान, धान संग्रहण केन्द्रो से गायब हो गये । जिससे शासन को करोड़ो का नुकासान हो गया । ताजा मामला महासमुंद जिले के पांच धान संग्रहण केन्द्रो में सामने आया है जहां हजारो टन धान गायब हो गया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस भाजपा पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा रही है और भाजपा जांच कर कार्यवाही करने की बात कह रही है ,वही धान संग्रहण केन्द्र प्रभारी व जिला विपणन अधिकारी इसे सूखत बता रहे है ।

महासमुंद जिले में विपणन वर्ष 2024-25 में 182 धान उपार्जन केन्द्रो के माध्यम से 1104273.24 टन धान खरीदा गया । धान उपार्जन केन्द्रो से 228887.52 टन धान जिले के पांच संग्रहण केन्द्रो ( महासमुंद , बागबाहरा , पिथौरा , बसना , सरायपाली ) में रखा गया । 9-10 माह बाद धान संग्रहण केन्द्रो से जिले के राइस मिलर एवं अन्य जिलो के राइस मिलरो के साथ कस्टम मिलिंग की गयी ,जिसमें 8211.64 टन धान का शार्टेज आया । महासमुंद में 2067.31 टन , बागबाहरा में 1810.56 टन , पिथौरा में 675.18 टन , बसना में 1396.36 टन एवं सरायपाली में 1718.80 टन का शार्टेज आया है ।जिसे लेकर तमाम बाते सामने आ रही है । अब इस पूरे मामले में कांग्रेस जहां भाजपा पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा रही है ,वही भाजपा जांच कर कार्यवाही करने की बात कह रही है ।

धान शार्टेज व चूहा के चट करने पर धान संग्रहण केन्द्र प्रभारी एवं जिला विपणन अधिकारी चूहे के द्वारा धान चट करने के बात को इंकार करते हुवे धान शार्टेज को सूखत बता रहे है ।

गौरतलब है कि शासन धान उपार्जन केन्द्रो में सूखत नही मानती है और धान संग्रहण केन्द्र में दो प्रतिशत का शार्टेज मानती है पर जिले के पांचों संग्रहण केन्द्रो मे 3.57 प्रतिशत शार्टेज आया है । बहरहाल शासन- प्रशासन इस शार्टेज पर क्या कार्यवाही करती है ये देखने वाली बात होगी ।

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