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17 फरवरी 2026/ महासमुंद/ बढ़ती आबादी और बेहतर यातायात व्यवस्था के उद्देश्य से शासन-प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर सड़क चौड़ीकरण का कार्य कर रहा है। लेकिन यदि यही चौड़ीकरण आम नागरिकों के लिए खतरा बन जाए, तो ऐसे विकास का क्या अर्थ? महासमुंद जिले में बीटीआई रोड़ से कलेक्टर कॉलोनी सड़क चौड़ीकरण के दौरान कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। बिना सूचना फलक के खुदे गड्ढे, सड़क पर फैला निर्माण सामग्री और जेसीबी से क्षतिग्रस्त होती पानी की पाइपलाइन लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है।

महासमुंद नगरपालिका क्षेत्र में बरोण्डा चौक से कलेक्टर कॉलोनी तक लगभग 2.3 किलोमीटर लंबी सड़क के चौड़ीकरण के लिए 10 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। कार्य एजेंसी के रूप में लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसने मेसर्स किरण बिल्डकॉन को ठेका दिया है। इस परियोजना के तहत सड़क के दोनों ओर नाली निर्माण और बीच में डिवाइडर बनाया जाना है। इसके लिए पेड़ों की कटाई, विद्युत पोल शिफ्टिंग और नाली निर्माण का कार्य जारी है। नियमानुसार, सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए—जैसे चेतावनी सूचना फलक, गड्ढों के चारों ओर लाल रेडियम संकेतक, और सफेद बोरे में भरी रेत। ताकि रात के समय वाहन चालकों को खतरे का संकेत मिल सके। लेकिन मौके पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बिना सुरक्षा इंतजाम के खुदे गड्ढे किसी भी बड़े हादसे को आमंत्रण दे रहे हैं। जेसीबी मशीन से खुदाई के दौरान पानी की पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंच रहा है। अब तक 10 से 12 बार पाइप फटने की घटना सामने आ चुकी है, जिससे लोगों को दो से तीन दिन तक पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। चौबीसों घंटे उड़ती धूल से स्थानीय नागरिक बीमार पड़ रहे हैं और दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने और कार्रवाई की मांग की है।

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इस मामले में नगरपालिका के जल प्रभारी का कहना है कि इस पाइप फटने की उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है।

वहीं कलेक्टर ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करने की बात कही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली, नोएडा और कानपुर में भी सड़क निर्माण के दौरान खुदे गड्ढों में गिरने से जानलेवा हादसे सामने आए थे। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी ठेकेदार और कार्य एजेंसी की लापरवाही को उजागर करती है। अब सवाल यह है—क्या प्रशासन हादसे के बाद जागेगा या समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे? फिलहाल नगरवासी डर और परेशानी के बीच जीने को मजबूर हैं। देखना होगा कि महासमुंद प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कार्रवाई करता है।

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