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21 फरवरी 2026/ महासमुंद/ पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई National Mission on Edible Oils – Oil Palm (NMEO-OP) योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। किसान अपनी बंजर पड़ी भूमि पर ऑयल पाम की खेती कर लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं।

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महासमुंद जिले में इस योजना की शुरुआत वर्ष 2012-13 में हुई। तब से अब तक लगभग 400 किसान 450 हेक्टेयर क्षेत्र में पाम की खेती कर रहे हैं। इन्हीं किसानों में से एक हैं भलेसर गांव के उन्नत किसान मुकेश चंद्राकर। महासमुंद मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़-उड़ीसा बॉर्डर पर स्थित उनके गांव में 33 एकड़ जमीन वर्षों से बंजर पड़ी थी। वर्ष 2016 में उड़ीसा यात्रा के दौरान उन्होंने पाम की खेती देखी और उससे प्रेरित होकर अपनी पूरी 33 एकड़ भूमि पर 1900 पौधे लगाए। योजना के तहत उन्हें पौधे, फेंसिंग, रखरखाव और ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर मिलीं। तीन से चार वर्षों बाद उत्पादन शुरू हुआ, जो अब 35 वर्षों तक लगातार फल देगा। आज मुकेश एक पौधे से औसतन 3000 रुपये सालाना कमा रहे हैं। प्रति एकड़ करीब 1 लाख 25 हजार रुपये की आय हो रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केला लगाया, जिससे डेढ़ लाख रुपये का लाभ हुआ। वर्तमान में वे कोको (जिससे चॉकलेट बनती है) की खेती कर रहे हैं और उत्पाद को निजी कंपनियों को बेच रहे हैं। कोको 1200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है। मुकेश का कहना है कि कम पानी, कम खाद और कम कीटनाशक में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिल रहा है, इसलिए किसानों को पाम की खेती अपनानी चाहिए।

महासमुंद का यह किसान न सिर्फ आत्मनिर्भर बना, बल्कि दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी दे रहा है। मजदूरों का कहना है कि पहले रोजगार के लिए भटकना पड़ता था, लेकिन अब सालभर यहीं काम मिल जाता है।

उद्यानिकी विभाग की सहायक संचालक का कहना है कि पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना ही इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

गौरतलब है कि भारत विश्व में पाम ऑयल का सबसे बड़ा आयातक देश है। खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन और दवाइयों तक में इसका व्यापक उपयोग होता है। हर वर्ष भारत लगभग 10 अरब डॉलर मूल्य का करीब 1 करोड़ मीट्रिक टन पाम ऑयल इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देशों से आयात करता है। ऐसे में महासमुंद जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी और अधिक आय वाली पाम खेती किसानों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने का माद्दा रखती है। यह फसल चक्र परिवर्तन और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।

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