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13 मार्च 2026/ राजिम/ शासकीय राजीव लोचन स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजिम में आयोजित श्री अन्न फूड फेस्टिवल कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) अनुसुइया अग्रवाल ने कहा कि श्री अन्न (मिलेट्स) मात्र भोजन नहीं, बल्कि भारतीयों की जीवन पद्धति और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अन्न के साथ “श्री” का जुड़ना समृद्धि और स्वास्थ्य दोनों का द्योतक है। कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सविता मिश्रा के मार्गदर्शन में तथा रूसा 2.0 के सहयोग से किया गया। अपने उद्बोधन में डॉ. अग्रवाल ने कहा कि श्री अन्न “चिर पुरातन और चिर नवीन” है। उन्होंने बताया कि भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेट्स ईयर घोषित किया गया, जिससे इस पारंपरिक आहार को वैश्विक पहचान मिली।

लोक साहित्य और परंपरा से जुड़ा है श्री अन्न

डॉ. अग्रवाल ने लोक साहित्य का उल्लेख करते हुए बताया कि प्राचीन लोकोक्तियों और मुहावरों में भी कोदो, कुटकी और सावा जैसे मिलेट्स का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि यह अनाज पोषण, स्वास्थ्य और पाचन की दृष्टि से अत्यंत लाभकारी है तथा प्रतिकूल जलवायु और पथरीली भूमि में भी इसकी सफल खेती की जा सकती है। उन्होंने सुप्रसिद्ध महाकाव्य कामायनी का उदाहरण देते हुए मानव जीवन की महत्ता और उसके संरक्षण में पारंपरिक आहार पद्धति की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

स्वस्थ जीवनशैली में मिलेट्स की भूमिका पर जोर

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. अभया आर. जोगलेकर (प्राचार्य, शासकीय बी.पी. लोधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय आरंग) ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते जंक फूड के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक जंक फूड सेवन से शुगर, डायबिटीज जैसी जीवनशैली संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इनसे बचाव के लिए पारंपरिक भारतीय आहार, विशेषकर मिलेट्स को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देश के कई प्रमुख मंदिरों में भी मिलेट्स से बने प्रसाद का उपयोग किया जाता है, जो इसकी सांस्कृतिक महत्ता को दर्शाता है।

विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने की पहल

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. सविता मिश्रा ने कहा कि मिलेट्स भारतीय परंपरा और स्वस्थ जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए अत्यंत उपयोगी बताया तथा दैनिक आहार में श्री अन्न को शामिल करने का संदेश दिया।

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र खोखर (इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर) ने श्री अन्न के उत्पादन, संभावनाओं और किसानों के लिए इसके महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष सुश्री छाया राही ने महाविद्यालय परिवार को कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु शुभकामनाएं दीं।

श्री अन्न आनंद मेला और पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम के अंतर्गत श्री अन्न आनंद मेला का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न मिलेट्स व्यंजनों का प्रदर्शन किया। इसके पश्चात प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया तथा अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजेश कुमार बघेल ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती श्वेता खरे ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, अतिथि व्याख्याता, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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