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16 मार्च 2026/ प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बसना क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं पावन स्थल गढ़फुलझर स्थित नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल होकर सिख समाज के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने यहां पहुंचकर पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेका तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में सहभागिता की। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से उनका सरोफा भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री राम विचार नेताम , बसना विधायक संपत अग्रवाल सहित डॉ. भगवान सिंह खोजी, ज्ञानी हरदीप सिंह, दविंदर सिंह, कमलजीत सिंह, नितिनदीप सिंह, कंवलप्रीत सिंह, अमृतपाल सिंह और देवेंद्र सिंह आनंद समेत सिख समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने पर जोर

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन भूमि स्थित नानकसागर अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां पूज्य गुरु नानक जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है और यहां आकर उन्हें गर्व और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है तथा इसके विकास के लिए लगभग 2.50 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। संबंधित कार्य प्रगति पर हैं और उन्हें शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि नानकसागर क्षेत्र के समग्र विकास और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।

ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है गढ़फुलझर

उल्लेखनीय है कि बसना क्षेत्र का गढ़फुलझर वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां वर्ष 1506 में अपनी पहली उदासी (विश्व भ्रमण) के दौरान Guru Nanak जी अमरकंटक और शिवरीनारायण के मार्ग से जगन्नाथ पुरी जाते समय दो दिनों तक ठहरे थे। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर तत्कालीन आदिवासी राजा मानस राज सागर चंद भेना ने लगभग 5 एकड़ भूमि गुरु महाराज के नाम समर्पित की थी, जिसे आज भी “गुरुखाप” के नाम से जाना जाता है। यहीं देश के प्रमुख गुरुद्वारों की तर्ज पर भव्य गुरुधाम निर्माण का प्रस्ताव है। गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि सर्वधर्म समभाव की मिसाल भी है। यहां अभेद किले, प्राचीन सुरंगों, रानी महल के अवशेषों के साथ रनेश्वर रामचंडी मंदिर और बूढ़ादेव मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं।

भविष्य में गुरुधाम निर्माण और पर्यटन विकास कार्यों के पूर्ण होने पर यह क्षेत्र एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होने की संभावना है, जो आने वाली पीढ़ियों को शांति, सेवा और भाईचारे के संदेश से प्रेरित करेगा।

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