




17 मार्च 2026/ महासमुंद/ वीरांगना रमोतीन माड़िया शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय नारायणपुर द्वारा हाइब्रिड मोड में आयोजित संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Program) के तृतीय दिवस पर मुख्य वक्ता के रूप में प्राचार्य अनुसुइया अग्रवाल ने शिक्षा में लैंगिक समानता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा में लैंगिक समानता का अर्थ केवल लड़कों और लड़कियों को स्कूल या कॉलेज भेजना नहीं, बल्कि उन्हें समान अवसर, पर्याप्त संसाधन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपनी क्षमता का पूर्ण विकास कर सकें। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विद्यालयों और महाविद्यालयों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ना है, जिससे देश में शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है। डॉ. अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में विभिन्न शासकीय योजनाओं जैसे ‘सर्व शिक्षा अभियान’ और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है और समाज में उनकी शिक्षा को लेकर सकारात्मक सोच विकसित हुई है। छात्रवृत्ति, अनुदान एवं छात्रावास जैसी सुविधाओं ने भी महिला शिक्षा को गति प्रदान की है। उन्होंने भारतीय समाज में महिलाओं की प्रगति के उदाहरण देते हुए अन्ना राजम मल्होत्रा, किरण बेदी , इंदिरा गांधी तथा द्रौपदी मुर्मू जैसी प्रेरणादायी हस्तियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा, परिवहन और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सशक्त भागीदारी दर्ज करा रही हैं।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य बी.डी. चांडक एवं डॉ. अनिल कुमार भतपहरी के मार्गदर्शन में तथा रूसा 2.0 के प्रायोजन से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथि व्याख्याता दीपिका कोर्राम ने की, जबकि डॉ. अनिल कुमार भतपहरी ने मुख्य वक्ता का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया। “उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता: नीतियां, चुनौतियां और अवसर” विषय पर आयोजित इस व्याख्यान के बाद प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें दुलेश्वरी कंडरा, डॉ. भतपहरी एवं मीना पोटाई सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने प्रश्न रखे। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। अंत में धन्यवाद ज्ञापन दुलेश्वरी कंडरा द्वारा किया गया।

