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न्यूज मंच डेस्क / महासमुंद। जिले के सिंघोडा थाना क्षेत्र में सामने आए 1.5 करोड़ रुपये मूल्य के 92 टन एलपीजी गैस चोरी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला खाद्य अधिकारी, गैस एजेंसी संचालक और गैस चूल्हा विक्रेता को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 3 मोबाइल फोन, 99 हजार 800 रुपये नगद तथा करीब 5 लाख रुपये मूल्य के होम अप्लायंस सामान जब्त किए हैं।

पुलिस अधीक्षक प्रभार कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि 24 दिसंबर 2025 को 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल वाहनों से अवैध रूप से गैस सिलेंडरों में भरते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद वाहनों को कार्रवाई हेतु सिंघोडा थाना के सुपुर्द किया गया था। बाद में 30 मार्च 2026 को सुरक्षा की दृष्टि से खाद्य विभाग की मौजूदगी में इन वाहनों को अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्लांट में रखा गया। 17 अप्रैल 2026 को जब वाहन मालिक न्यायालय से रिलीज आदेश लेकर प्लांट पहुंचा तो सभी कैप्सूल वाहनों से करीब 92 टन एलपीजी गैस गायब मिली, जिसकी कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई। वाहन मालिक की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की।जांच में ठाकुर पेट्रोकेमिकल अभनपुर के दो डायरेक्टर और प्लांट मैनेजर की संलिप्तता सामने आई। पुलिस ने पहले प्लांट मैनेजर को गिरफ्तार किया। आगे की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस के अनुसार जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर और सोनू ट्रेडर्स संचालक मनीष चौधरी ने 23 मार्च को बैठक कर एलपीजी गैस बेचने की योजना बनाई थी। आरोप है कि तीनों ने मिलकर ठाकुर पेट्रोकेमिकल के डायरेक्टरों से एक करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसके बाद 80 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।
डील के अनुसार खाद्य अधिकारी अजय यादव को 50 लाख रुपये, पंकज चंद्राकर को 20 लाख रुपये और मनीष चौधरी को 10 लाख रुपये मिलने थे। रकम मिलने के बाद 6 कैप्सूल वाहनों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल प्लांट के हवाले कर दिया गया।पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि 6 और 8 अप्रैल को खाली कैप्सूल वाहनों का वजन कराया गया, लेकिन उस दौरान न तो प्लांट मालिक मौजूद थे और न ही कोई स्वतंत्र गवाह। इसके बाद खाद्य अधिकारी कार्यालय में कथित तौर पर फर्जी पंचनामा तैयार किया गया, जिसमें मनीष चौधरी और पंकज चंद्राकर को गवाह बनाया गया। फोन कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में कुल 6 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें जिला खाद्य अधिकारी, गैस एजेंसी संचालक, गैस चूल्हा विक्रेता और प्लांट मैनेजर की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि ठाकुर पेट्रोकेमिकल के दो डायरेक्टर अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 316(3), 316(5), 61, 238, 336(3), 338, 340(2) तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 और 7 के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया है।

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