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न्यूज मंच डेस्क / 24 अप्रैल 2026/आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए करोड़ों रुपये के आरओ फिल्टर अधिकांश आंगनबाडी केन्द्रो में शोपीस बनकर रह गए हैं। सक्षम आंगनबाड़ी योजना और जिला खनिज न्यास मद के तहत स्थापित किये जा रहे ये आरओ सिस्टम विभागीय लापरवाही के चलते एक साल बाद भी चालू नहीं हो पाए हैं। इससे हजारों नौनिहाल आज भी शुद्ध पानी से वंचित हैं।जिले में कुल 1795 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां करीब 65 हजार बच्चे प्रारंभिक शिक्षा के लिए पहुंचते हैं। इन बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग संचानालय द्वारा 600 आरओ प्यूरीफायर अनुमानित लागत लगभग 90 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराए गए। वहीं जिला खनिज न्यास मद से 640 आरओ सिस्टम करीब 3 करोड़ 17 लाख 76 हजार रुपये खर्च कर जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदे गए। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में ये आरओ फिल्टर या तो दीवारों पर लटके हुए हैं, या स्टोर रूम में पड़े हैं, या फिर सुरक्षा के नाम पर कार्यकर्ताओं के घरों में रखे गए हैं। पानी की उपलब्धता और इंस्टॉलेशन की व्यवस्था नहीं होने के कारण ये सिस्टम आज तक चालू नहीं हो पाए है ।हैरानी की बात यह है कि विभाग द्वारा ठेकेदार को 63 लाख रुपये की पहली किस्त का भुगतान भी किया जा चुका है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने बताया कि लगभग एक वर्ष से आरओ मशीनें पड़ी हुई हैं, लेकिन न तो पानी की व्यवस्था की गई और न ही इंस्टॉलेशन पूरा किया गया, जिससे बच्चों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।

वहीं जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि विभागीय लापरवाही के कारण बच्चों को शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है।

इस पूरे मामले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में है और सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कर व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाएगा।

गौरतलब है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद योजना अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रही है। बड़ा सवाल यह है कि जब बुनियादी पानी की सुविधा ही उपलब्ध नहीं थी, तो इतने बड़े स्तर पर आरओ सिस्टम की खरीदी क्यों की गई? अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस लापरवाही पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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