


न्यूज मंच डेस्क /महासमुंद/ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों द्वारा नियमों को दरकिनार कर किए जा रहे अनियंत्रित कारोबार के विरोध में बुधवार को महासमुंद जिले में थोक एवं चिल्हर दवा बाजार पूरी तरह बंद रहा। आंदोलन के समर्थन में जिला दवा विक्रेता संघ महासमुंद ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

जिला दवा विक्रेता संघ के सचिव अरशी अनवर ने बताया कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर पारंपरिक दवा व्यापार को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना उचित सत्यापन के नकली, प्रतिबंधित और संवेदनशील दवाओं की बिक्री की जा रही है, जो आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जिन दवाओं को केवल डॉक्टर के लिखित पर्चे पर ही दिए जाने का कानूनी प्रावधान है, वे भी ऑनलाइन माध्यम से आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे युवाओं में नशे और दवाओं के दुरुपयोग की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यापार बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा का आंदोलन है।
संघ ने सरकार और प्रशासन से ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियों पर सख्त नियंत्रण लगाने तथा प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान जिला दवा विक्रेता संघ महासमुंद के जिला सचिव अरशी अनवर, ब्लॉक अध्यक्ष संजय जैन, मनोज मालू और शैलू अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
संघ की अपील का असर
जिलेभर में देखने को मिला और शहर सहित जिले के अधिकांश स्वतंत्र थोक एवं रिटेल मेडिकल स्टोर बंद रहे। हालांकि, राष्ट्रव्यापी केमिस्ट हड़ताल को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ ने आम नागरिकों को राहत देने के लिए आवश्यक दवाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए थे।
प्रशासन ने जिले में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों, धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर्स, शासकीय अस्पतालों, नर्सिंग होम्स और अन्य औषधि वितरण केंद्रों में जरूरी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

