


न्यूज मंच डेस्क /महासमुंद मुख्यालय से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम बम्हनी में खेत समतल करने के दौरान प्राचीन मंदिरों के अवशेष मिलने से क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। प्रारंभिक जांच में इन अवशेषों को 6वीं से 8वीं शताब्दी का माना जा रहा है। पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की टीम ने स्थल का निरीक्षण कर इसे ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण खोज बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थल विश्व प्रसिद्ध सिरपुर के समकालीन ही नहीं, बल्कि उससे भी अधिक प्राचीन हो सकता है।

ग्राम बम्हनी के गौठान के समीप खेत समतलीकरण के दौरान विशाल आमलक, द्वारपाल की प्रतिमाएं, नक्काशीदार स्तंभों के टुकड़े तथा गर्भगृह के हिस्से प्राप्त हुए हैं। सूचना मिलने पर पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक निरीक्षण किया। विभाग के अनुसार मिले अवशेष इस बात के प्रमाण हैं कि यहां कम से कम दो प्राचीन मंदिर विद्यमान रहे होंगे। संभावना जताई जा रही है कि मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा अभी भी जमीन के नीचे सुरक्षित दबा हुआ है, जिससे भविष्य में उत्खनन के दौरान महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारियां सामने आ सकती हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बम्हनी क्षेत्र को प्राचीन समय से “पंच देवरी” के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां पांच प्रमुख देवस्थानों का अस्तित्व था। वर्तमान में जहां अवशेष मिले हैं, उसे मुख्य मंदिर स्थल माना जा रहा है। इसके अलावा गांव के अन्य हिस्सों में भी प्राचीन मंदिरों और संरचनाओं के अवशेष होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार बम्नेश्वर नाथ महादेव मंदिर, शीतला दुर्गा मंदिर तथा किल्ला पारा क्षेत्र भी ऐतिहासिक महत्व रखते हैं। किल्ला पारा में आज भी प्राचीन नगर के प्रवेश द्वार के अवशेष मौजूद हैं, जहां महामाया माता की प्रतिमा स्थापित है। स्थानीय लोगों का दावा है कि किल्ला पारा से परदेवरी तक फैला पूरा क्षेत्र कभी एक विकसित और समृद्ध प्राचीन नगर था। क्षेत्र का संबंध लोकगाथा लोरिक-चंदा से भी जोड़ा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यहां के निर्माण में लाल ईंटों और बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है। साथ ही अवशेषों पर दिखाई देने वाली नक्काशी की शैली सिरपुर के प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर से काफी हद तक मेल खाती है। इससे इस खोज का ऐतिहासिक महत्व और बढ़ गया है।पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि विस्तृत सर्वेक्षण और संभावित उत्खनन के बाद इस क्षेत्र के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण रहस्यों से पर्दा उठ सकता है।बम्हनी में मिले इन अवशेषों ने महासमुंद जिले की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान देने का काम किया है।
संजय कन्नौजे, संचालक, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, रायपुर, ने कहा कि प्रारंभिक अध्ययन में स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतीत हो रहा है और इसके ऐतिहासिक महत्व का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।
वहीं होरी लाल पाण्डेय और खिलावन यादव, ग्रामीण बम्हनी, ने बताया कि गांव में लंबे समय से प्राचीन मंदिरों और देवस्थलों की मान्यता रही है, जो अब मिले पुरातात्विक प्रमाणों से पुष्ट होती दिखाई दे रही है।

