


न्यूज मंच डेस्क/महासमुंद/28 जुलाई 2026/ क्या आपने कभी ऐसे बैंक के बारे में सुना है, जहां रुपये-पैसे नहीं बल्कि साबुन जमा किए जाते हों?छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के शासकीय प्राथमिक शाला तुमगांव ने इस अनोखी पहल को हकीकत में बदल दिया है। यहां संचालित ‘साबुन बैंक’ बच्चों में स्वच्छता की आदत विकसित करने के साथ-साथ उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
शासकीय प्राथमिक शाला तुमगांव में वर्ष 2025 से शिक्षकों ने स्वच्छता को संस्कार बनाने के उद्देश्य से साबुन बैंक की शुरुआत की। इस पहल के तहत सत्र प्रारंभ होते ही प्रत्येक छात्र-छात्रा से एक साबुन लाने का आग्रह किया जाता है। इसमें अभिभावक और शिक्षक भी अपनी सहभागिता निभाते हैं। स्कूल में दीप प्रज्ज्वलित कर साबुन बैंक का शुभारंभ किया जाता है और इसे उत्सव की तरह मनाया जाता है। वर्तमान में कक्षा पहली से पांचवीं तक अध्ययनरत 49 छात्र-छात्राएं इस अभियान से जुड़े हुए हैं। बच्चे मध्याह्न भोजन से पहले, शौचालय के उपयोग के बाद और खेलकूद के बाद नियमित रूप से साबुन से हाथ धोते हैं। इस आदत का असर उनके घरों में भी दिखाई देने लगा है, जहां बच्चे परिवार के अन्य सदस्यों को भी हाथ धोने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।विद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि साबुन बैंक शुरू होने के बाद बच्चों में चर्म रोग और संक्रमण जैसी समस्याओं में कमी आई है। बच्चों ने स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है और वे स्वयं भी दूसरों को हाथ धोने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
साबुन बैंक की परिकल्पना करने वाले सहायक शिक्षक जितेन्द्र साहू ने बताया कि इस नवाचार का उद्देश्य स्वच्छ भारत अभियान की भावना को मजबूत करना और बच्चों को बचपन से ही स्वच्छ एवं स्वस्थ रहने की आदत डालना है।उनका कहना है कि जब बच्चे स्वयं साबुन लाकर बैंक में जमा करते हैं तो उनमें जिम्मेदारी और सहभागिता की भावना भी विकसित होती है।
विद्यालय में साबुन बैंक के अलावा पुस्तकालय, दर्पण, कंघी और नेल कटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि बच्चों में व्यक्तिगत स्वच्छता की आदत विकसित हो सके।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, इस पहल का सकारात्मक प्रभाव विद्यालय की दर्ज संख्या पर भी पड़ा है। साबुन बैंक अब केवल स्वच्छता का अभियान नहीं, बल्कि बच्चों को स्वस्थ, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनाने की एक प्रेरणादायी पहल बन चुका है।

