


न्यूज मंच डेस्क /महासमुंद/ सरकार द्वारा शासकीय स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, गणवेश, मध्यान्ह भोजन, छात्रवृत्ति, बालिकाओं को साइकिल सहित अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके बावजूद महासमुंद जिले में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती जा रही है, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है।
जिले में कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए कुल 1956 शासकीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1276 प्राथमिक, 492 माध्यमिक, 62 हाई स्कूल तथा 126 हायर सेकेंडरी विद्यालय शामिल हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में सरकारी स्कूलों में 1 लाख 70 हजार 980 छात्र-छात्राएं दर्ज थे। यह संख्या वर्ष 2022-23 में घटकर 1 लाख 62 हजार 310 हो गई। इसके बाद वर्ष 2023-24 में 1 लाख 54 हजार 809, वर्ष 2024-25 में 1 लाख 48 हजार 57 तथा वर्ष 2025-26 में घटकर 1 लाख 41 हजार 503 रह गई। इस प्रकार पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों से कुल 29 हजार 477 विद्यार्थियों की कमी दर्ज की गई है। पालकों का कहना है कि शिक्षकों की कमी, शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर चिंता के कारण वे अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने को मजबूर हो रहे हैं।



वहीं शिक्षक का भी मानना है कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने और शिक्षकों से लगातार गैर-शैक्षणिक कार्य लिए जाने के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। उनका कहना है कि विभिन्न सरकारी कार्यों में व्यस्त रहने के चलते वे विद्यार्थियों को पर्याप्त समय नहीं दे पाते, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
दूसरी ओर शिक्षा विभाग के अधिकारी इस विषय पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि आंकड़ों का पुनः परीक्षण किया जाएगा और इसके बाद ही स्थिति पर स्पष्ट टिप्पणी की जा सकेगी।
गौरतलब है कि जहां सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है, वहीं जिले के निजी विद्यालयों में नामांकन तेजी से बढ़ रहा है। जिले में वर्तमान में 283 गैर-शासकीय विद्यालय संचालित हैं। वर्ष 2023-24 में निजी स्कूलों में 48 हजार 91 विद्यार्थियों का नामांकन था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 51 हजार 835 हो गया। वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 55 हजार 222 तक पहुंच गई। यानी केवल तीन वर्षों में निजी विद्यालयों में 7 हजार 131 विद्यार्थियों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।सरकारी स्कूलों में तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने और बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने के बावजूद विद्यार्थियों की संख्या में लगातार गिरावट होना शासन और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब सवाल यह है कि आखिर सरकारी स्कूलों से लोगों का भरोसा क्यों कम हो रहा है और इसे पुनः स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

