



न्यूज मंच डेस्क /महासमुंद जिले की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक चिंताजनक तस्वीर झलप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आई है।महासमुंद मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-53 के किनारे स्थित इस अस्पताल में चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि कागजों में डॉक्टर और चिकित्सा कर्मियों की पदस्थापना होने के बावजूद अस्पताल का संचालन ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। झलप का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 20 बिस्तरों वाला अस्पताल है, जहां आसपास के करीब 80 गांवों के लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं।अस्पताल में एक चिकित्सा अधिकारी और दो रजिस्टर्ड मेडिकल असिस्टेंट (आरएमए) के पद स्वीकृत हैं। अभिलेखों के अनुसार एक चिकित्सा अधिकारी और एक आरएमए पदस्थ हैं,जबकि एक आरएमए का पद रिक्त है। लेकिन वर्तमान में चिकित्सा अधिकारी पिछले तीन माह से पीजी की पढ़ाई के लिए अवकाश पर हैं और आरएमए दो माह से संतान पालन अवकाश पर हैं। वहीं पूर्व में यहां अटैच किए गए एक अन्य आरएमए को भी उसकी मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेज दिया गया है।ऐसे में अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर उपलब्ध है और न ही आरएमए। पूरा अस्पताल दो ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और अन्य कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है।डॉक्टरों की अनुपस्थिति का सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर मामलों तक के मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सक नहीं होने के कारण उन्हें अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ के साथ-साथ समय की भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।मरीजों का कहना है कि अस्पताल में नियमित चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से अपेक्षित स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इस मामले में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
गौरतलब है कि महासमुंद जिले में 222 उप स्वास्थ्य केंद्र, 30 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 5 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा एक जिला अस्पताल संचालित हैं। ऐसे में झलप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति जिले की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

