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न्यूज मंच डेस्क /महासमुंद/महर्षि विद्या मंदिर, मचेवा, महासमुंद में ब्रह्मचारी गिरीश चंद्र वर्मा वेद विद्या मार्तंड के निर्देशानुसार आयोजित तीन दिवसीय 25 घंटे का इन-हाउस टीचर्स ट्रेनिंग एवं कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (सीबीपी) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों के व्यावसायिक कौशल का विकास, नवीन शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के विभिन्न आयामों की जानकारी प्रदान करना था।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिदिन गुरु पूजन, प्राणायाम, ध्यान, सिद्धि योग एवं योग फ्लाइंग अभ्यास के साथ हुई। इन सत्रों का संचालन सुभाष पांडे एवं संदीप शर्मा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम दिवस का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. अनुसुइया अग्रवाल (डी.लिट.), प्राचार्य स्वामी आत्मानंद आदर्श अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय महासमुंद तथा विद्यालय के प्राचार्य आर.के. तिवारी द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। स्वागत गीत कु. भीमेश्वरी साहू ने प्रस्तुत किया। अपने उद्बोधन में प्रो. डॉ. अनुसुइया अग्रवाल ने शिक्षकों को समय प्रबंधन, अनुशासन, सतत अध्ययन, समर्पण और सक्रियता के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का निरंतर सीखते रहना ही उसे प्रभावी एवं प्रेरणादायी बनाता है। प्रथम दिवस के दूसरे सत्र में शासकीय आईटीआई महासमुंद से आए प्रशिक्षण अधिकारी एस.एल. वर्मा, श्रीमती खिलेश्वरी ध्रुव एवं श्रीमती इभा मिंज ने व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दसवीं कक्षा के बाद विद्यार्थी विभिन्न औद्योगिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में करियर बनाकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।तीसरे सत्र में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) महासमुंद के रिसोर्स पर्सन ईश्वर चंद्राकर एवं विनय कुमार यादव ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के शैक्षिक उपयोगों पर विस्तृत जानकारी दी।उन्होंने शिक्षकों को बताया कि एआई आधारित तकनीकें शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक और समयानुकूल बना सकती हैं। इस दौरान चैटजीपीटी सहित विभिन्न डिजिटल टूल्स का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।

दूसरे दिन मुख्य वक्ता के रूप में महर्षि विद्या मंदिर-2 रायपुर की प्राचार्य श्रीमती मोनिका मिश्रा उपस्थित रहीं। उन्होंने भारतीय वैदिक परंपरा, संस्कार आधारित शिक्षा एवं भारतीय संस्कृति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा और नैतिक मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है।

प्रशिक्षण के तीसरे दिन डायट के व्याख्याता किरण कन्नौजे ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य और शिक्षा की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित किया। उनके व्याख्यान के लिए श्रीमती अर्चना गोतमरे ने आभार व्यक्त किया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों ने विभिन्न विषयों पर समूह आधारित प्रस्तुतियां भी दीं, जिनमें नवाचार, शिक्षण कौशल और शैक्षणिक गतिविधियों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का फीडबैक प्रस्तुत करते हुए गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रशिक्षण में शामिल होकर सभी शिक्षकों ने नई जानकारियां प्राप्त कीं तथा उनमें नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है, जिससे वे विद्यार्थियों का बेहतर मार्गदर्शन कर सकेंगे।अंत में प्राचार्य आर.के. तिवारी ने सभी अतिथियों, रिसोर्स पर्सन्स, शिक्षकों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय के शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों के सहयोग से यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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