




न्यूज डेस्क/ 20 अप्रैल 2026/ महासमुंद/ देश में महिला आरक्षण को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी कड़ी में महासमुंद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने कांग्रेस भवन में प्रेसवार्ता आयोजित कर भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।प्रेसवार्ता में द्वारिकाधीश यादव ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” यानी 106वां संविधान संशोधन विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की स्वीकृति के बाद कानून बन चुका है। इसके बावजूद भाजपा द्वारा 16 अप्रैल 2026 को एक अन्य संशोधन विधेयक को 131वें संविधान संशोधन के रूप में पेश किया गया, जिसका महिला आरक्षण से सीधा संबंध नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और परिसीमन की प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करने का प्रयास किया जा रहा था। इसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित थीं। विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जब 2026-27 में नई जनगणना प्रस्तावित है और जातिगत जनगणना पर भी चर्चा चल रही है, तो पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना उचित नहीं है। द्वारिकाधीश यादव ने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में महिला आरक्षण लागू करना चाहती है, तो वर्तमान सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता, जिसके लिए कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के मुद्दे का उपयोग अपने अनुकूल परिसीमन के लिए कर रही है, लेकिन विपक्ष की एकजुटता के चलते यह प्रयास सफल नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की समर्थक रही है। उन्होंने बताया कि पंचायत और नगरीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिलाने की पहल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1989 में की थी, जिसे बाद में 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में लागू किया गया। इसके अलावा 2010 में डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण के लिए विधेयक राज्यसभा से पारित किया गया था। अंत में द्वारिकाधीश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं को वास्तविक आरक्षण देना नहीं चाहती, बल्कि इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रही है।

