



महासमुंद जिले में 28 खंडपीठों के माध्यम से सुलह एवं समझौते के आधार पर मामलों का हुआ निराकरण, पक्षकारों को पौधे भी किए गए वितरित
न्यूज मंच डेस्क /महासमुंद/ न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण तथा पक्षकारों को आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को जिला महासमुंद में वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद की अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में जिला न्यायालय महासमुंद, कुटुंब न्यायालय तथा पिथौरा, सरायपाली, बसना और बागबाहरा के न्यायालयों सहित कुल 28 खंडपीठों का गठन किया गया।नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायालय के सभाकक्ष में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया, कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश प्रफुल्ल कुमार सोनवानी, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुश्री संघपुष्पा भतपहरी सहित अन्य पीठासीन अधिकारी, अधिवक्ता, पक्षकार, विभिन्न विभागों एवं वित्तीय संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी तथा न्यायालयीन कर्मचारी उपस्थित रहे। लोक अदालत में श्रमिक विवाद, बैंक रिकवरी, विद्युत एवं देयकों की बकाया राशि, राजस्व प्रकरण, राजीनामा योग्य दांडिक मामले, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामले, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, विद्युत अधिनियम से संबंधित प्रकरण तथा सिविल मामलों का निराकरण किया गया।
68,586 मामलों का हुआ निराकरण
प्री-लिटिगेशन मामलों में बैंक रिकवरी के 5,337 प्रकरणों में 19 लाख 89 हजार 261 रुपये, विद्युत के 11,072 प्रकरणों में 59 लाख 94 हजार 810 रुपये, श्रम के 9 प्रकरणों में 3 लाख 19 हजार 700 रुपये, एमएसीटी के 46 प्रकरणों में 5 करोड़ 15 लाख 36 हजार रुपये तथा एनआई एक्ट-138 के 21 प्रकरणों में 46 लाख 59 हजार 747 रुपये के अवार्ड पारित किए गए। इसके अलावा जिले के विभिन्न तहसील एवं अनुभाग क्षेत्रों के राजस्व न्यायालयों के माध्यम से 47,531 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस प्रकार नेशनल लोक अदालत में कुल 68,586 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 8 करोड़ 37 लाख 76 हजार 690 रुपये के अवार्ड पारित किए गे।
कबाड़ से जुगाड़ की प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान
नेशनल लोक अदालत के अवसर पर शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह, बरोण्डा बाजार में रह रहे विधि से संघर्षरत बालकों द्वारा पुरानी एवं अनुपयोगी सामग्री से तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई। स्टॉल में चित्रकला, क्राफ्ट एवं हस्तशिल्प की सामग्री प्रदर्शित की गई। संस्था के कला एवं क्राफ्ट शिक्षक केदार धीवर एवं सहयोगियों द्वारा तैयार सामग्री का पीठासीन अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों एवं न्यायिक कर्मचारियों ने अवलोकन किया।वन विभाग द्वारा वनोषधि सामग्री, श्रम विभाग द्वारा श्रम पंजीयन तथा स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं दवा वितरण की व्यवस्था भी की गई। शिक्षा विभाग की ओर से शासकीय बृजराज शाला महासमुंद के विद्यार्थियों को पुस्तकों का वितरण किया गया।
पक्षकारों को पौधे देकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
लोक अदालत में विभिन्न प्रकरणों में उपस्थित पक्षकारों को पीठासीन अधिकारियों द्वारा फलदार एवं छायादार पौधे भेंट किए गए।पक्षकारों को पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने भी न्यायालय परिसर में पहुंचे पक्षकारों एवं आम नागरिकों को पौधे वितरित किए।
एमएसीटी के 9 मामलों में 1.03 करोड़ रुपये के अवार्ड
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ क्रमांक-1 में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 9 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें 5 प्रकरण मृतकों के वारिसों से संबंधित तथा 4 प्रकरण आहत व्यक्तियों से संबंधित थे। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 3 लाख 70 हजार रुपये के अवार्ड पारित किए गए। प्रकरणों में समझाइश के बाद पक्षकारों के बीच आपसी सुलह एवं समझौता कराया गया। इस अवसर पर मृतकों के परिजनों, वारिसों एवं आहत पक्षकारों को पौधे भी भेंट किए गे।
समझाइश से दो दंपतियों ने फिर साथ रहने का लिया फैसला
नेशनल लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय खंडपीठ क्रमांक-2 में वैवाहिक विवाद से जुड़ा एक मामला भी आपसी सुलह से समाप्त हुआ। धारा 13(1)(क) हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद के लिए लंबित मामले में पीठासीन अधिकारी प्रफुल्ल कुमार सोनवानी ने दोनों पक्षों को समझाइश दी। समझाइश से प्रभावित होकर दंपति ने अपना दाम्पत्य जीवन फिर से साथ बिताने पर सहमति जताई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच राजीनामा होने से प्रकरण समाप्त किया गया।इसी प्रकार तुमगांव थाना क्षेत्र के एक अन्य वैवाहिक प्रकरण में भी पीठासीन अधिकारी के सुलह प्रयास के बाद दोनों पक्ष साथ रहकर दाम्पत्य जीवन निर्वाह करने के लिए सहमत हुए। दोनों मामलों में दंपतियों को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
व्हीलचेयर पाकर रागिनी के चेहरे पर आई मुस्कान
नेशनल लोक अदालत के अवसर पर समाज कल्याण विभाग के सहयोग से दिव्यांग बालिका रागिनी धृतलहरे को व्हीलचेयर प्रदान की गई। महासमुंद विकासखंड के ग्राम धनसुली निवासी सीताराम धृतलहरे ने अपनी 20 वर्षीय पुत्री के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध कराने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन दिया था।रागिनी जन्म से ही दोनों पैरों से चलने में असमर्थ है और घर से बाहर निकलकर गांव की गलियों, चौक-चौराहों एवं मोहल्लों में घूमना चाहती थी। आवेदन पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री चेतना ठाकुर ने संवेदनशील पहल करते हुए समाज कल्याण विभाग को शासन की योजनाओं के तहत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके फलस्वरूप नेशनल लोक अदालत के अवसर पर रागिनी को व्हीलचेयर प्रदान की गई। व्हीलचेयर मिलने से रागिनी और उसके परिवार के चेहरे पर खुशी देखने को मिली।

