



प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बढ़ी आमदनी, तालाब से लेकर हैचरी तक रोजगार के नए अवसर

न्यूज मंज /महासमुंद, 13 सितंबर 2026/ धान की पारंपरिक खेती में बढ़ती लागत और सीमित आमदनी के बीच महासमुंद जिले के किसान अब मछली पालन को कमाई और रोजगार का नया जरिया बना रहे हैं। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले में करीब 150 किसान मछली पालन को व्यवसाय के रूप में अपना चुके हैं। सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान से किसानों को तालाब निर्माण, पाउंड लाइनर यूनिट, हैचरी और अन्य गतिविधियां शुरू करने में मदद मिल रही है।
इसी बदलाव की मिसाल बिरकोनी निवासी किसान दिनेश चन्द्राकर हैं।
पारंपरिक खेती में लागत बढ़ने के बाद उन्होंने मछली पालन की ओर कदम बढ़ाया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करीब 7.50 लाख रुपये की लागत से एक हेक्टेयर में तालाब तैयार कराया। इसके बाद करीब 14 लाख रुपये की लागत से 20 हजार वर्गफुट में पाउंड लाइनर स्थापित की। सरकार से मिले अनुदान ने इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिनेश के मुताबिक पाउंड लाइनर में मछली के बच्चों को तैयार कर तालाब में डाला जाता है। करीब 8 से 9 महीने में लगभग 15 टन मछली तैयार हो जाती है, जिसे मछुआरों के माध्यम से बाजार में बेचा जाता है। एक किलो मछली तैयार करने में करीब 70 से 80 रुपये की लागत आती है, जबकि बाजार में इसे 90 से 110 रुपये प्रति किलो तक बेचने से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।

28 लाख की यूनिट से सालाना 3 से 4 लाख रुपये की बचत
ग्राम बकमा के किसान हिमांशु चन्द्राकर ने भी प्रधानमंत्री मत्स्य योजना का लाभ लेकर करीब 28 लाख रुपये की लागत से दो पाउंड लाइनर यूनिट तैयार कराईं। उन्हें सरकार की ओर से 60 प्रतिशत अनुदान मिला। हिमांशु बताते हैं कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें सालाना करीब 3 से 4 लाख रुपये की बचत हो जाती है। इस तरह मछली पालन उनके लिए आय का मजबूत और स्थायी जरिया बन गया है।

गांव में ही मिलने लगा सालभर रोजगार
मछली पालन का लाभ सिर्फ तालाब और यूनिट संचालकों तक सीमित नहीं है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। बिरकोनी में मछली पालन से जुड़े मजदूरों का कहना है कि पहले काम की तलाश में उन्हें दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही सालभर रोजगार मिल रहा है। करीब 9 हजार रुपये प्रतिमाह की आय के साथ नियमित काम मिलने से परिवार के खर्च चलाने में भी सहूलियत हो रही है।

बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने पर जोर
सरकार की योजना किसानों को मछली पालन से जोड़ने के साथ इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दे रही है। नए तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक यूनिट, हैचरी, कोल्ड स्टोरेज और मछली दाना निर्माण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि का प्रयास किया जा रहा है।

40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत महिला, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को 60 प्रतिशत, जबकि सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को 40 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।महासमुंद जिले में किसान इस योजना का लाभ लेकर मछली पालन के साथ हैचरी और मछली दाना निर्माण जैसी गतिविधियों से भी जुड़ रहे हैं।

धान की खेती पर निर्भरता के बीच मछली पालन अब महासमुंद के किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी के साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है। सरकारी योजनाओं और किसानों की मेहनत के मेल से गांवों में स्वरोजगार की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है।

