



न्यूज मंच /महासमुंद/ कभी कृषि-मजदूरी और जंगल से मिलने वाली वनोपज पर निर्भर रहने वाली महासमुंद जिले के जोरातराई गांव की आदिवासी महिलाएं अब डेयरी व्यवसाय के जरिए आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। गांव की 17 आदिवासी महिलाओं ने पशु चिकित्सा विभाग की योजना का लाभ लेकर डेयरी व्यवसाय शुरू किया है। आज ये महिलाएं प्रतिदिन करीब 180 लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं और हर महीने करीब 10 से 12 हजार रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं।

दो गायों से शुरू हुआ सफर, बढ़कर 180 लीटर हुआ दूध उत्पादन
महासमुंद जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत भीमखोज का आश्रित ग्राम जोरातराई आदिवासी बहुल गांव है। करीब 885 की आबादी वाले इस गांव में अधिकांश परिवार कृषि-मजदूरी और वनोपज पर निर्भर हैं।पशु चिकित्सा विभाग ने केंद्र सरकार की विशेष केंद्रीय सहायता के तहत आदिवासी विकास उपयोजना के माध्यम से गांव की 17 महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ा। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को करीब 1 लाख 98 हजार रुपये की सहायता से दो गाय, चारा-बर्तन, पशुओं का बीमा और पांच महीने के चारे की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।शुरुआत में 17 महिलाओं के पास कुल 34 गाय थीं और इनसे प्रतिदिन करीब 60 लीटर दूध का उत्पादन होता था। प्रशिक्षण, पशुपालन की बेहतर जानकारी और नियमित देखभाल के बाद अब दूध उत्पादन बढ़कर करीब 180 लीटर प्रतिदिन हो गया है।



महिलाओं ने संभाली दुग्ध समिति की कमान
दूध उत्पादन बढ़ने के बाद पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से गांव में दुग्ध समिति का गठन किया गया। अब महिलाएं सिर्फ दूध उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समिति के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।दुग्ध समिति इन महिलाओं से करीब 35 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध खरीदती है और लगभग हर दस दिन में भुगतान किया जाता है। इससे महिलाओं को नियमित आमदनी का जरिया मिला है।




डेयरी व्यवसाय ने महिलाओं की आर्थिक स्थिति के साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाया
जो महिलाएं पहले दूसरों के खेतों और घरों में मजदूरी करती थीं, वे अब खुद का व्यवसाय चला रही हैं। उनकी आय बढ़ने से परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।
दूसरी महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित
जोरातराई की इन महिलाओं का कहना है कि पशुपालन और डेयरी व्यवसाय ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। अब वे गांव की दूसरी महिलाओं को भी डेयरी व्यवसाय से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

चिकित्सा विभाग की उप संचालक ने बताया

पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक योजना का उद्देश्य केवल पशु उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि आदिवासी परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है।
महासमुंद में 15 हजार परिवार डेयरी से जुड़े
महासमुंद जिले में डेयरी व्यवसाय से महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। नीति आयोग द्वारा संचालित डेयरी व्यवसाय से जिले की अन्य समुदायों की 147 महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं। जिले में करीब 15 हजार परिवार डेयरी उत्पादन से जुड़े हैं और इनके माध्यम से प्रतिदिन करीब 65 हजार लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है। जिले में 169 दुग्ध समितियों के माध्यम से दूध का संग्रहण किया जा रहा है।
जोरातराई की 17 आदिवासी महिलाओं की यह पहल बताती है कि प्रशिक्षण, सरकारी सहयोग और मेहनत के जरिए ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। डेयरी व्यवसाय ने न केवल इन महिलाओं के लिए आमदनी का नया जरिया तैयार किया है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी को भी मजबूत किया है।

