



न्यूज मंच /महासमुंद/ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र एवं व्यापक समीक्षा की मांग को लेकर महासमुंद में सोमवार को सियासी गतिविधियां तेज रहीं। जिला कांग्रेस कमेटी और आम आदमी पार्टी ने कलेक्टोरेट घेराव के लिए अलग-अलग रैली निकाली। वहीं, भाजपा ने प्रेसवार्ता कर कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव के नेतृत्व में कांग्रेसियो ने नेहरू चौक पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन किया। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओ की रैली कचहरी चौक, बरोण्डा चौक और बीटीआई रोड होते हुए कलेक्टोरेट के लिए कूच की , लेकिन कांग्रेस की रैली को पुलिस ने अपने दूसरे सुरक्षा घेरे पर रोक ली। यहां प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर झूमाझटकी भी हुई । गौरतलब है कि कांग्रेस के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कलेक्टोरेट की सुरक्षा के लिए तीन स्तर की बैरिकेडिंग की थी। पहली बैरिकेडिंंग कौशिक कालोनी मोड़ पर दूसरी न्यायालय मोड़ पर सुरक्षा घेरा बनाया गया था, जबकि कलेक्टोरेट के मुख्य गेट पर भी बैरिकेडिंग कर पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस द्वारा कांग्रेस की रैली को दूसरे बैरिकेडिंग के पास रोकने पर कांग्रेसियो ने विरोध- प्रदर्शन किया। बाद में कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन को दो सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष द्वारिकाधीश यादव ने कहा कि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों पर किया पलटवार
वहीं, कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के बीच भाजपा ने महासमुंद में प्रेसवार्ता कर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। भाजपा जिला अध्यक्ष येतराम साहू ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, यदि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों से संतुष्ट नहीं है तो उसे न्यायालय का रुख करना चाहिए। येतराम साहू ने कहा कि भाजपा का चुनाव आयोग से कोई लेना-देना नहीं है और कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की प्रक्रिया और निर्णयों पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को उपलब्ध कानूनी माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।

