



84 लाख रुपये के बिजली बिल के भुगतान पर फंसा मामला, ढाई किलोमीटर के मार्ग पर अंधेरा; मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल आने-जाने वालों की बढ़ी परेशानी
न्यूज मंच/महासमुंद/ छत्तीसगढ़ के महासमुंद में नेशनल हाईवे-353 पर स्ट्रीट लाइटें बंद होने से राहगीरों और आसपास के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।महासमुंद से घोड़ारी की ओर जाने वाले मार्ग पर ग्राम पंचायत खरोरा क्षेत्र में करीब दो सप्ताह से अंधेरा पसरा हुआ है। इसकी वजह स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिल के भुगतान को लेकर नगर पालिका महासमुंद और ग्राम पंचायत खरोरा के बीच सामने आया सीमा विवाद है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, लेकिन इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ढाई किलोमीटर के मार्ग पर अंधेरा, दुर्घटना की आशंका
महासमुंद शहर से लगे नेशनल हाईवे-353 पर ग्राम पंचायत खरोरा क्षेत्र में लगभग ढाई किलोमीटर के हिस्से में स्ट्रीट लाइटें बंद होने से रात के समय सड़क पर अंधेरा छाया रहता है। जानकारी के मुताबिक, बिजली बिल का भुगतान नहीं होने और विद्युत आपूर्ति बंद करने के लिए बिजली विभाग को लिखित आवेदन दिए जाने के बाद इन लाइटों की बिजली आपूर्ति बंद हो गई है। स्ट्रीट लाइटें बंद होने से हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों के साथ आसपास के ग्रामीणों को भी परेशानी हो रही है। रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द स्ट्रीट लाइटें चालू कराने की मांग की है।
मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल आने-जाने वालों को परेशानी
स्ट्रीट लाइटें बंद होने से यह समस्या और गंभीर हो गई है, क्योंकि खरोरा क्षेत्र के इसी मार्ग पर मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और नगर पालिका का मणिकंचन केंद्र स्थित है। रात के समय मरीजों, उनके परिजनों, मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं और अन्य लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहना सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। अंधेरे के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में संबंधित विभागों को आपसी विवाद सुलझाकर जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करनी चाहिए।
पंचायत बोली- हमने नहीं लगवाई लाइटें, तो बिल क्यों भरें?
स्ट्रीट लाइटों के बिजली बिल को लेकर नगर पालिका और ग्राम पंचायत के बीच जिम्मेदारी का विवाद सामने आया है। ग्राम पंचायत खरोरा की सरपंच श्रीमती वीणा कमलेश चंद्राकर का कहना है कि इन स्ट्रीट लाइटों की स्थापना पंचायत ने नहीं कराई है। ऐसे में बिजली बिल के भुगतान की जिम्मेदारी पंचायत पर डालना उचित नहीं है।वहीं, नगर पालिका महासमुंद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी सौरभ शर्मा का कहना है कि इन स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल करीब 84 लाख रुपये आया है। चूंकि स्ट्रीट लाइटें नगर पालिका की सीमा से बाहर ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगी हैं, इसलिए नगर पालिका मद से इस बिल का भुगतान करना उचित नहीं है।दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क दे रहे हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदारी को लेकर समाधान नहीं निकलने के कारण स्ट्रीट लाइटें बंद हैं।
चार साल पहले लगी थीं स्ट्रीट लाइटें
जानकारी के अनुसार, इन स्ट्रीट लाइटों की स्थापना करीब चार वर्ष पहले तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर खनिज न्यास मद से कराई गई थी अंबेडकर चौक से जिला अस्पताल तक की स्ट्रीट लाइटे नगरपालिका महासमुंद के द्वारा लगाया गया था। इसके बाद से बिजली बिल का भुगतान नगर पालिका द्वारा किया जाता रहा है। अब नगर पालिका द्वारा लाइटों को अपनी सीमा से बाहर बताते हुए भुगतान पर सवाल उठाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है।इस पूरे मामले में सवाल उठ रहा है कि जब स्ट्रीट लाइटों की स्थापना प्रशासनिक निर्देश पर हुई थी और पहले से नगर पालिका बिजली बिल का भुगतान करती आ रही थी, तो अब भुगतान को लेकर विवाद क्यों खड़ा हो गया? क्या संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं की गई थी?
जिम्मेदारी की खींचतान में परेशान हो रहे आम लोग
नेशनल हाईवे-353 पर स्ट्रीट लाइटें बंद होने का मामला अब नगर पालिका और ग्राम पंचायत के बीच सीमा विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। इसका सीधा असर आम नागरिकों, वाहन चालकों, मरीजों और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।फिलहाल, बिजली बिल के भुगतान की जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस विवाद का समाधान कब होगा और खरोरा क्षेत्र के ढाई किलोमीटर लंबे मार्ग पर दोबारा रोशनी कब लौटेगी?

