



20 वर्षों से गहन चिकित्सा इकाई का इंतजार, 330 बिस्तरों वाले अस्पताल में रोजाना पहुंचते हैं करीब 550 मरीज
न्यूज मंच विशेष/ महासमुंद/ 14 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक गंभीर सवाल सामने आया है। जिला अस्पताल से संबद्ध शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में करीब 20 वर्षों से गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू (ICU) की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है। कोविड महामारी के दौरान अस्पताल को लाखों रुपये की लागत वाले 15 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन आईसीयू शुरू नहीं होने के कारण इनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि 15 में से 6 वेंटिलेटर खराब हो चुके हैं, जबकि शेष 9 मशीनें इस्तेमाल होने का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
330 बिस्तरों वाले अस्पताल में ICU नहीं
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार महासमुंद जिले की आबादी करीब 10 लाख 32 हजार थी, जो अब बढ़कर लगभग 12 लाख होने का अनुमान है। जिले में वर्ष 2006 में 100 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल की शुरुआत हुई थी। इसके बाद वर्ष 2021 में मेडिकल कॉलेज खुलने के साथ जिला अस्पताल को शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध कर 330 बिस्तरों वाले अस्पताल में तब्दील कर दिया गया। वर्तमान में यहां महासमुंद के अलावा गरियाबंद और बलौदाबाजार जिले से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 550 मरीजों के ओपीडी में आने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद गंभीर मरीजों के इलाज के लिए जरूरी आईसीयू की सुविधा अब तक शुरू नहीं हो पाई है।
कोविड काल में मिले 15 वेंटिलेटर, 6 हुए खराब
कोविड महामारी के दौरान अस्पताल में आईसीयू सुविधा विकसित करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री राहत कोष से 6 और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) के माध्यम से 9 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए गए थे। इस तरह अस्पताल को कुल 15 वेंटिलेटर मिले। हालांकि, आईसीयू की शुरुआत नहीं होने के कारण इन मशीनों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो सका। वर्तमान में 6 वेंटिलेटर खराब हो चुके हैं, जबकि 9 मशीनें अब भी इस्तेमाल की प्रतीक्षा कर रही हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर सवाल खड़े करती है।
हर दिन 10 मरीज रेफर, 2 से 3 गंभीर
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, यहां से प्रतिदिन औसतन 10 मरीजों को विभिन्न कारणों से दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है। इनमें करीब 2 से 3 मरीज गंभीर स्थिति वाले होते हैं, जिन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी और गहन उपचार की जरूरत पड़ सकती है। इस आधार पर हर महीने लगभग 60 से 90 गंभीर मरीजों को आईसीयू जैसी सुविधा की आवश्यकता पड़ने का अनुमान है।
आईसीयू में गंभीर रूप से बीमार मरीजों की चौबीसों घंटे होती निगरानी
दुर्घटनाओं में गंभीर चोट, जटिल सर्जरी, हृदय संबंधी समस्याओं, सांस लेने में गंभीर परेशानी तथा किडनी और लीवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों में इसकी जरूरत पड़ सकती है। गर्भवती महिलाओं में गंभीर जटिलताओं के दौरान भी गहन चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है। जिला अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसे मरीजों को जरूरत के अनुसार उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गंभीर मरीजों को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराना भी चुनौती बना हुआ है।
स्टाफ की कमी का हवाला दे रहा अस्पताल प्रबंधन
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आईसीयू शुरू करने के लिए लंबे समय से शासन से मांग की जा रही है। इस वर्ष सुविधा शुरू होने की उम्मीद भी जताई जा रही है। हालांकि, आईसीयू के नियमित संचालन के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की उपलब्धता जरूरी है। ऐसे में सवाल यह है कि जब अस्पताल को पहले ही वेंटिलेटर उपलब्ध कराए जा चुके हैं, तो बाकी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर आईसीयू शुरू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है? इस संबंध में अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत महेश्वरी का कहना है कि आईसीयू शुरू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द शुरु हो जायेगा ।
ICU के मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
महासमुंद जिला अस्पताल में आईसीयू की सुविधा नहीं होने का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। प्रदेश में वर्ष 2003 से 2018 तक भाजपा की सरकार रही। इसके बाद वर्ष 2018 से 2023 तक कांग्रेस सत्ता में रही और दिसंबर 2023 से प्रदेश में फिर भाजपा की सरकार है। इसके बावजूद महासमुंद के मरीजों को आईसीयू सुविधा का इंतजार करना पड़ रहा है।कांग्रेस की पूर्व जिलाध्यक्ष डा रश्मि चन्द्राकर ने स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा का कहना है कि जल्द ही यह सुविधा शुरू होने की उम्मीद है।
कब मिलेगी मरीजों को राहत?
महासमुंद का जिला अस्पताल अब 330 बिस्तरों वाला अस्पताल है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद आईसीयू जैसी महत्वपूर्ण सुविधा का अभाव स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर 15 वेंटिलेटर में से 6 का खराब होना चिंता का विषय है, तो दूसरी ओर प्रशिक्षित स्टाफ और आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण आईसीयू का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।अब देखना होगा कि शासन और अस्पताल प्रबंधन इस दिशा में कब तक ठोस कदम उठाते हैं और महासमुंद जिले के मरीजों को अपने ही जिला अस्पताल में गहन चिकित्सा की सुविधा मिल पाती है या नहीं।

