



न्यूज मंच / महासमुंद से तुमगांव तक करीब 9.65 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण का काम निर्धारित समय सीमा खत्म होने के करीब पांच महीने बाद भी पूरा नहीं हो सका है। करीब 25 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत वाली इस सड़क का ठेका लगभग 19 करोड़ 86 लाख रुपये में रायपुर की मेसर्स जे.डी. कंस्ट्रक्शन को दिया गया था। सड़क निर्माण मई 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन अब तक करीब 6 किलोमीटर हिस्से में ही एक कोट डामरीकरण हो पाया है। वहीं करीब 3 किलोमीटर हिस्सा गिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है।
लोक निर्माण विभाग के अनुसार महासमुंद-तुमगांव मार्ग के चौड़ीकरण के लिए शासन ने 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। विभाग ने मई 2025 में कार्यादेश जारी किया था और मई 2026 तक निर्माण पूरा करने की समय सीमा तय की गई थी। समय सीमा बीतने के बावजूद एकता चौक से बेमचा गांव के बीच करीब 3 किलोमीटर हिस्से में डामरीकरण का काम नहीं हो पाया है।अधूरे हिस्से में सड़क पर गिट्टी डालकर काम रोक दिए जाने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बड़े वाहनों के गुजरने पर सड़क से धूल का गुबार उठता है। इससे बाइक और साइकिल चालकों को दिक्कत हो रही है। वहीं गिट्टियां उछलने से राहगीरों को चोट लगने का खतरा भी बना हुआ है। सड़क किनारे संचालित दुकानदारों का कहना है कि दिनभर उड़ने वाली धूल से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। धूल के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने जल्द से जल्द सड़क निर्माण पूरा कराने की मांग की है।
डामर के बढ़े दाम से प्रभावित हुआ काम
निर्माण में देरी को लेकर लोक निर्माण विभाग की कार्यपालन अभियंता नीता रामटेके ने बताया कि डामर का दाम बढ़ना भी एक कारण है निर्माण कार्य प्रभावित होने का। विभाग ने ठेकेदार से बातचीत की है और ठेकेदार ने दिसंबर 2026 तक सड़क निर्माण पूरा करने की बात कही है। वहीं टेंडर राशि बढ़ाने का मामला राज्य शासन के स्तर पर है।
अब सवाल यह है कि दिसंबर 2026 तक सड़क का निर्माण पूरा हो पाता है या नहीं। साथ ही बढ़ी निर्माण लागत के बीच निर्धारित राशि में काम पूरा होने पर सड़क की गुणवत्ता किस तरह सुनिश्चित की जाएगी, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अधूरी सड़क, धूल और गिट्टी के कारण राहगीरों और सड़क किनारे कारोबार करने वाले लोगों की परेशानी बनी हुई है।

