



न्यूज मंच /महासमुंद/ जिले के ग्राम लाफिन कला के ग्रामीणों ने जनसहयोग से गांव के विकास की ऐसी मिसाल पेश की है, जो दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। ग्रामीण सरकारी बजट का इंतजार करने के बजाय आपसी सहयोग और ग्राम फंड के माध्यम से गांव की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। ग्रामीणों का ध्येय वाक्य है— “अपना काम खुद कर लो।”
करीब 1200 की आबादी वाले लाफिन कला में ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर निर्माण, कच्ची सड़कों का मुरूमीकरण, कांक्रीट सड़क और गौठान सहित कई विकास कार्य कराए गए हैं। अब ग्रामीण करीब 40 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल वाले गौठान के कांक्रीटकरण का काम जनसहयोग से कर रहे हैं।इसमें करीब 18 हजार वर्गफीट हिस्से में कांक्रीट का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष हिस्से में निर्माण कार्य जारी है।ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दौरान गौठान में कीचड़ की समस्या होती थी। इससे मवेशियों को बैठने में परेशानी होती थी और गोबर भी कीचड़ में मिल जाता था।कांक्रीटकरण के बाद मवेशियों के लिए बेहतर जगह उपलब्ध होने के साथ ही इस स्थान का उपयोग गांव के सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए भी किया जा सकेगा। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की समस्याओं के समाधान के लिए शासन-प्रशासन या जनप्रतिनिधियों से राशि मिलने का इंतजार करने में काफी समय लग जाता है। इसलिए ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से गांव के विकास की जिम्मेदारी उठाई है। उनके अनुसार अब तक करीब 50 लाख रुपये की लागत से मंदिर, सड़क और अन्य विकास कार्य जनसहयोग से पूरे किए जा चुके हैं।लाफिन कला में तालाब के बीच करीब 25 लाख रुपये की लागत से आकर्षक मंदिर का निर्माण भी जनसहयोग से कराया जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीणों ने आवागमन की समस्या को देखते हुए गांव की कच्ची सड़कों का मुरूमीकरण भी कराया है।
ग्रामीणों की इस पहल की प्रशासन ने भी की सराहना
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने जनभागीदारी से गांव की जरूरतों को पूरा करने की पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि दूसरे ग्राम पंचायतों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।
लाफिन कला के ग्रामीणों की पहल बताती है कि सामूहिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी के जरिए स्थानीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जा सकता है। सरकारी योजनाओं के साथ ग्रामीणों का सामूहिक प्रयास गांव के विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

